अदम गोंडवी: जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्क़ाम कर देंगे

, by शब्दांकन संपादक


 अदम गोंडवी
जो डलहौज़ी न कर पाया 
    वो ये हुक़्क़ाम कर देंगे
कमीशन दो तो 
    हिन्दोस्तान को नीलाम कर देंगे

ये बन्दे-मातरम का गीत 
    गाते हैं सुबह उठकर
मगर बाज़ार में चीज़ों का 
    दुगुना दाम कर देंगे

सदन में घूस देकर 
    बच गई कुर्सी तो देखोगे
वो अगली योजना में 
    घूसखोरी आम कर देंगे
read more

कविता आमंत्रण

, by शब्दांकन संपादक

निरंतर आती रचनाओं का संपादन हो रहा है; 

आप अपनी कम से कम ३ कवितायेँ , संक्षिप्त परिचय व नवीन चित्र के साथ sampadak@shabdankan.com पर मेल करें.


read more

शुरुआत

, by शब्दांकन संपादक


शब्दांकन कर्मी पिछले ३ माह से संकलन कर रहे हैं.

जल्द सब कुछ , आपके सामने होगा 

आप भी अपनी विधा की रचना इत्यादि भेज सकते हैं




read more

परिचय: डॉ. रमेश यादव

, by शब्दांकन संपादक

गाँव में जन्में. धूल-मिटटी में खेले. पढ़ाई के लिए घर में ही जंग लड़े. मड़ई से निकले. पगडंडियों से चलकर, बनारस पहुंचे. विश्वविद्यालयी छात्र जीवन में दाखिल हुए. करीब १२ साल तक रहे. तमाम उतार-चढ़ाव देखे. एक दशक तक वामपंथी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे. करीब 7 साल मुख्यधारा की पत्रकारिता में कलम की मजदूरी किये.
महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से 'पत्रकारिता और नक्सलवादी आन्दोलन' पर पी-एच.डी.किये.
सितम्बर, २००६ में देश की राजधानी दिल्ली की तरफ कूच किये. हमारे सपने, खेतों-खलिहानों में उगे, पफने और बड़े हुए. संघर्षों से संघर्ष का ककहरा, यहीं सीखा. जीवन सर्वहारा था, है और रहेगा. इसलिए पूरी दुनिया में जहाँ कहीं की अवाम सामाजिक-शैक्षिक-सांस्कृतिक, गैर-बराबरी की शिकार है. समान राजनैतिक भागीदारी के लिये जूझ रही है, आर्थिक आत्मनिर्भरता और आज़ादी उसका लक्ष्य है. मेरी कलम उन्हीं संघर्षरत अवाम के उद्देश्यों, उम्मीदों और लक्ष्यों के पक्ष में मजदूरी करने के लिये प्रतिबद्ध है, सच्चे जनवादी जनतंत्र की स्थापना होने तक.
फ़िलहाल पत्रकारिता में अध्ययन-अध्यापन.
डॉ. रमेश यादव (पीएचडी)
सहायक प्राध्यापक
पत्रकारिता एवं नव मीडिया अध्ययन विद्यापीठ
(School of Journalism and New Media Studies)
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU)
ईमेल : rameshglobalcommunication@gmail.com
वेबसाइट : www.ignou.ac.in/sojnms

read more

परिचय: तेजेन्द्र शर्मा

, by शब्दांकन संपादक

तेजेन्द्र शर्मा (Tejendra Sharma)

जन्मः 21 अक्टूबर  (जगरांव – पंजाब), भारत।

मातृ भाषाः पंजाबी।

प्रकाशित कृतियां -

कहानी संग्रहः 
काला सागर (1990) ढिबरी टाईट (1994), देह की कीमत (1999) यह क्या हो गया (2003), बेघर आंखें (2007), सीधी रेखा की परतें – समग्र भाग 1 (2009), क़ब्र का मुनाफ़ा (2010), दीवार में रास्ता (2012) ।

कविता / ग़ज़ल संग्रहः 
ये घर तुम्हारा है - (2007)।

संपादित कृतियां –
ब्रिटेन में उर्दू क़लम (2010) समुद्र पार रचना संसार (2008), यहां से वहां तक (2006) समुद्र पार हिन्दी ग़ज़ल (2011)।

अनूदित कृतियां – पासपोर्ट का रङहरू (नेपाली – कहानी संग्रह), ईंटों का जंगल (उर्दू – कहानी संग्रह), ढिम्बरी टाइट, कल फेर आंवीं (दोनो पंजाबी कहानी संग्रह)।

अंग्रेज़ी में
Black & White (biography of a banker – 2007),  Lord Byron - Don Juan (1977),  John Keats - The Two Hyperions (1978)

विशेषः 
दूरदर्शन के लिये शांति सीरियल का लेखन।
अन्नु कपूर निर्देशित फ़िल्म अभय में नाना पाटेकर के साथ अभिनय।

कथा यू.के. संस्था की लंदन में स्थापना जिसके माध्यम से ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ़
कॉमन्स में प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान एवं पद्मानंद साहित्य सम्मान का आयोजन।

पुरस्कार / सम्मान: 1.ढिबरी टाइट को महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार – 1995,  2.सहयोग फ़ाउंडेशन का युवा साहित्यकार पुरस्कार – 1998, 3.सुपथगा सम्मान -1987, 4. कृति यू.के. द्वारा बेघर आंखें को ब्रिटेन की सर्वश्रेष्ठ कहानी का सम्मान,  5.प्रथम संकल्प साहित्य सम्मान – दिल्ली (2007), 6. तितली बाल-पत्रिका साहित्य सम्मान – बरेली (2007),  7.भारतीय उच्चायोग द्वारा डॉ. हरिवंशराय बच्चन सम्मान (2008)।

कहानी अभिशप्त चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के एम.ए. पाठ्यक्रम में शामिल। 

संपर्कः kahanikar@gmail.com; kathauk@gmail.com 

दूरभाषः 00-44-7400313433


read more

परिचय: ज़किया ज़ुबैरी

, by शब्दांकन संपादक



ज़किया ज़ुबैरी


जन्मः  01 अप्रैल;   
स्थानः लखनऊ
मातृ भाषाः हिन्दी,  
बचपन एवं स्कूली शिक्षाः आज़मगढ़, इलाहाबाद।
शिक्षाः स्नातक, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय।

सहज सरल स्वभाव की विदुषी ज़किया जी को बचपन से ही सृजनात्मक लेखन एवं चित्रकारी में रुचि रही है। आप हिंदी, अंग्रेज़ी एवं उर्दू तीनों भाषाओं में समान अधिकार रखती हैं। ज़क़िया जी की रचनाएं पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती हैं। आपकी भाषा में गंगा जमुनी तहज़ीब की सुगंध है। ज़किया जी ने कम किंतु स्तरीय लिखा है। ज़किया जी उन लेखिकाओं में से हैं जो स्वयं को प्रमोट न कर दूसरे लेखकों को मंच प्रदान करने में संतुष्टि महसूस करती हैं। आप एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स नाम की संस्था की अध्यक्षा हैं। आपने नृत्य, संगीत, गीत एवं लेखन क्षेत्र में बहुत से नये नर्तकों, गायकों, एवं लेखकों को लंदन में मंच प्रदान करवाया है।
लेबर पार्टी के टिकट पर तीन बार चुनाव जीतने वाली ज़किया जी लंदन के बारनेट संसदीय क्षेत्र के कॉलिंडेल वार्ड की पहली और एकमात्र मुस्लिम महिला काउंसलर हैं। आप ग़रीबों और कमज़ोरों की लड़ाई पूरी शिद्दत से लड़ती हैं और उन्हें सरकार से उनके हक़ दिलवाने के सफल प्रयास करती हैं।
आपने हिन्दी और उर्दू के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान बीच की दूरियां पाटने के लिये बहुत से प्रयास किये हैं। आप साहित्य के माध्यम से इन दूरियों को पाटने में विश्वास रखती हैं।
आप ने लंदन में बसे गायक शमील चौहान द्वारा गाई एवं संगीतबद्ध की ग़ज़लों की सी.डी. जारी की। इसके साथ साथ हिन्दी लेखकों की कहानियों का उर्दू में अनुवाद एवं पुस्तक रूप में प्रकाशन कराया और उनकी ऑडियो सीडी भी बनवाईं। आपने ब्रिटेन के उर्दू लेखकों की कहानियां हिंदी में अनुवाद करवा कर  संपादित किया है और ब्रिटेन की उर्दू क़लम के नाम से प्रकाशित किया है। विश्व भर के हिन्दी ग़ज़लकारों के ग़ज़लों के संग्रह समुद्र पार हिन्दी ग़ज़ल का संपादन किया है।
जनवरी 2007 में खाड़ी हिन्दी सम्मेलन में ज़किया ज़ुबैरी ने हिन्दी एवं उर्दू के बीच की दूरियों को घटाने के लिये महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कहानी मेरे हिस्से की धूप के लिए आपको इंटरनेट पत्रिका अभिव्यक्ति ने वर्ष 2008 में पांच हज़ार रुपए का पुरस्कार दिया। आपकी कहानियाँ हँस, गगनांचल एवं रचना समय जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती है।
संप्रतिः काउँसिलर, बॉरो ऑफ बारनेट-लंदन
संपर्कः 115 The Reddings, Mill Hill, London NW7 4JP.
ई-मेलः zakiiaz@gmail.com
दूरभाषः (मोबाइल) – 00-44-(0)7957353390
read more

परिचय: विवेक मिश्र

, by शब्दांकन संपादक


विवेक मिश्र


15 अगस्त 1970 में उत्तर प्रदेश के झांसी शहर में जन्म। विज्ञान में स्नातक, दन्त स्वास्थ विज्ञान में विशेष शिक्षा, पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्कोत्तर। एक कहानी संग्रह-‘हनियाँ तथा अन्य कहानियाँ’ प्रकाशित। 'हनियां', 'तितली', 'घड़ा', 'ऐ गंगा तुम बहती हो क्यूँ?' तथा 'गुब्बारा' आदि चर्चित कहानियाँ। लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व कहानियाँ प्रकाशित। साठ से अधिक वृत्तचित्रों की संकल्पना एवं पटकथा लेखन। 'light through a labrynth' शीर्षक से कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद राईटर्स वर्कशाप, कलकत्ता से तथा कहानिओं का बंगला अनुवाद डाना पब्लिकेशन, कलकत्ता से प्रकाशित।

संपर्क- 123-सी, पाकेट-सी, मयूर विहार फेज़-2, दिल्ली-91

read more